विद्वानों के दृष्टिकोण में तंत्र का महत्व

लेखक

  • Dr Garima ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.52984/ijomrc102

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तंत्र##common.commaListSeparator## मनवांछित फल

सार

यह लेख तंत्र की प्राचीनता, महत्व, सकारात्मक उपयोग तथा समाज और व्यक्ति के कल्याण में इसकी संभावित भूमिका पर चर्चा करता है।

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1. तंत्र महाविज्ञान ,पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान वेद नगर, बरेली |१९९४ पेज ०४

2. तंत्र क्रिया और योग विद्या, स्वामी सत्यानंद सरस्वती ,बिहार योग विद्यालय मुंगेर,|पेज ३७०

3. उद्धृत तंत्र महाविज्ञान, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान वेदनगर, बरेली|१९९पेज32

4. तंत्र आलोक, प्रथम भाग, डा परमहंस मिश्र, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी| 5/57

5. सावित्री कुंडली एवं तंत्र, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, अखंड ज्योति संस्थान, मथुरा| पेज ८१७

6. योग तंत्र साधना ,डॉ रमेश चंद्र अवस्थी, विश्वविद्यालय प्रकाशन वाराणसी|,१९९६ पेज ०८

7. तंत्र महाविज्ञान, भाग 1, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान वेद नगर, बरेली |१९९४

8. तंत्र महाविज्ञान, भाग 1, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान वेद नगर, बरेली |१९९४पेज 33

9. तंत्र महाविज्ञान, भाग 1, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान वेद नगर, बरेली |१९९४ पेज १५

10. तंत्र आलोक, प्रथम भाग, डा परमहंस मिश्र, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी|पेज 11

11. तंत्र महाविज्ञान, भाग 1, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान वेद नगर, बरेली |१९९४पेज1 ४३

12. अखण्ड ज्योति ,पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य,जून १९४० पेज 3

13. अखण्ड ज्योति,डा प्रणव पण्डया,2004, पृ 33

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प्रकाशित

2021-01-28

अंक

खंड

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